About Me

Hailing from one of the most politically engaged areas of India, Eastern UP and after the completion of UG & PG from Gorakhpur University, I have shifted my academic orientation to Area Studies (International Relations). Written dissertation on India's Border Management and accomplished doctorate from SIS, JNU making comparative analysis between two different borders of India with Pakistan and Nepal.

Currently, I am heading the Department of Political Science, Galgotias University and majorly dealing with subjects of theoretical and diplomatic concerns global politics.

I, frequently share my humble opinions and perspectives through popular newspaper, digital mediums, journals and blogs in English as well as in Hindi.




Tuesday, December 26, 2017

दौलत, शोहरत या मेहनत, क्या है लाइफ की कुंजी ?

इस life में सबसे खूबसूरत और सबसे डरावना एक ही न बदलने वाला सच है और वह है: uncertainity ! हमें नहीं पता होता कि अगले ही moment पर क्या होने वाला है। कुछ भी हो सकता है सो उसकी तैयारी हम करते हैं। education लेते हैं, job ढूंढते हैं और अपने से बड़ों से अक्सर words of wisdom लेते हैं। पर जिंदगी कभी पूरी खुलती नहीं और past अगर repeat भी करता है तो इतने creative ढंग से repeat करता है कि उसे present में face करते वक्त words of wisdom अक्सर काम ही नहीं आते या बस थोड़ी सी मदद कर पाते हैं।
हमें क्या चाहिए life से हम तो यहीं confuse रहते हैं, क्योंकि हम देखते हैं कि जिन्हें हम अपनी life में admire करते हैं वे अलग-अलग लोग हैं और अलग-अलग चीजों ने उनके life में click किया है।1938 में Harvard ने एक बड़ा research project लिया, जिसे Adult Development Program  नाम दिया गया। दो groups के कुल 744 लोगों पर यह study की गयी। पहला group, Harvard से pass outs लोगों से बना और दूसरा Boston के poor suburbs के लोगों से बना। ऐसे research सचमुच survive नहीं करते पर luckily यह research आज भी चल रहा है और उन 744 में से अधिकांश जिन्दा हैं और अपने 90s में हैं। कई doctor बने, कई lawyers, कुछ ने MNCs में job ली, एक अमेरिका के president बने, कुछ alchohlic हो गए और कुछ Schizophrenic हो गए। बहुत ही धीरे-धीरे काफी minute detailing  के साथ इस research के लगभग 80 साल हुए। इस project के वर्तमान director, Robert Waldinger ने इस स्टडी के conclusions अपने एक TED Talk में share किया।
आश्चर्यजनक रूप से एक happy and healthy life के लिए wealth, Fame और hardwork से कहीं अधिक relationships की आवश्यकता है, ऐसा इस research का conclusion है। इस relationships में यह matter नहीं करता कि आप कितने लोगों से जुड़े हैं बल्कि relationship की quality important है। यह भी पाया गया कि अपने 90s में वही लोग happy, healthy और satisfied मिले जो relationships में deeply connected हैं। सबसे important conclusion यह है कि quality relationships न केवल physically benefit करते हैं बल्कि यह brain के लिए भी effective है। पाया गया कि quality relationships वालों की memory भी चुस्त मिली।
आह, life के जितने भी best lessons होते हैं वे इतने simple होते हैं, कि उनपर belief ही नहीं होता !!!

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