About Me

Hailing from one of the most politically engaged areas of India, Eastern UP and after the completion of UG & PG from Gorakhpur University, I have shifted my academic orientation to Area Studies (International Relations). Written dissertation on India's Border Management and accomplished doctorate from SIS, JNU making comparative analysis between two different borders of India with Pakistan and Nepal.

Currently, I am heading the Department of Political Science, Galgotias University and majorly dealing with subjects of theoretical and diplomatic concerns global politics.

I, frequently share my humble opinions and perspectives through popular newspaper, digital mediums, journals and blogs in English as well as in Hindi.




Wednesday, December 27, 2017

कुलभूषण जाधव, अजमल कसाब नहीं हैं...


कभी भारतीय नेवी में काम कर चुका एक शख्स जो अपनी अधेड़ उम्र में ईरान जाकर कारोबार कर रहा था कि सहसा उसका अपहरण हो जाता है। पाकिस्तानी मीडिया हल्ला मचाती है कि उसने भारत के जासूस को पकड़ा है वह भी अपने प्रान्त बलूचिस्तान से। कहा जाता है कि वह रॉ का एक जासूस है, जो बलूचिस्तान में हुए कई बम विस्फोटों का जिम्मेदार है। पाकिस्तानी मार्शल कोर्ट उसे गुनहगार मानती है और फांसी की सजा सुनाती है। भारत सरकार हरकत में आती है और सजा के खिलाफ इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस, हेग में अपील करती है। पंद्रह सदस्यीय जजों का पैनल (जिसमें भारत के जस्टिस दलवीर भंडारी भी हैं ) उस शख्स की सजा पर रोक लगा देता है। भारत सरकर राहत की साँस लेती है और उनके परिवारजनों को उस शख्स से मिलवाने की कूटनीतिक जुगत लगाती है। यह मेहनत रंग लाती है और भारी इंटरनेशनल दबाव में पाकिस्तान, उस शख्स को उसकी माँ और पत्नी से मिलवाने के लिए राजी हो जाता है। पत्नी और माँ की सघन जांच होती है, महज सादे कपड़ों में उस शख्स से मीटिंग करवाई जाती है, बात आमने-सामने पर फोन से होती है, जिसे अधिकारी सुन रहे होते हैं और उनके बीच में एक मोटी पर पारदर्शी दीवार होती है। अगले दिन पाकिस्तान के सारे अख़बार देश की दरियादिली पर लहालोट होते हैं और उस शख्स की पत्नी के जूतों में सदिग्ध वस्तु होने की बात कहते हैं।
जी हाँ, उस शख्स का नाम है, कुलभूषण जाधव !
राजनीति में खासकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सच वह माना जाता है जो आपको और आपके देश को सूट करता है। तो सच क्या है, यह इस लेख का विषय नहीं है। कुछ बातें और कहीं जा सकती हैं, जिससे सीन और समझ में आ सकता है। देशों में सरकारें होती हैं, उन्हें फिर फिर चुनाव जीतकर सत्ता में आना होता है। चुनाव एक खर्चीली और कठिन प्रक्रिया है। राजनीतिक जनभागेदारी और राजनीतिबोध से शून्य समाज में सरकारें अमूमन भ्रष्ट होती हैं और वे ऐसे मुद्दे खोजती और बनाती हैं, जिसमें जनता का ध्यान जाए, जनता खुश हो और मूल समस्याएँ किनारे पडी रहें। भारत-पाकिस्तान की सरकारों में यह आम है, इसलिए जबतब ही किसी घटना पर भारत में ‘विदेशी हाथ’ और पाकिस्तान में ‘खुफ़िआ हाथ’ होने की बात की जाती है।
हमने अजमल कसाब को जब रंगे हाथों पकड़ा तो पाकिस्तान के लिए वह अंतरराष्ट्रीय शर्म से गुजरने जैसा था। हमने अजमल कसाब का गुनाह कुबूलता विडिओ चलाया और कसाब कहता सुना गया कि उसके साथ भारतीय अधिकारी बहुत अच्छे से पेश आये और भारतीय अख़बारों में उसके लिए बिरयानी के खर्चों की चर्चा हुई। कसाब ने उसी वीडियो में कुबूला कि गरीबी में उसने आतंक का रास्ता चुना और आईएसआई ने उसे ट्रेनिंग दी है। बाद में भारतीय कोर्ट ने उसी दोषी पाया और फांसी की सजा दे दी। चूँकि कसाब के लिए भारत के पास ढेरों सुबूत थे और कसाब भारतीय जमीन पर पकड़ा गया, इसलिए पाकिस्तान चाहकर भी इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस नहीं जा सकता था बल्कि पाकिस्तान ने तो आधिकारिक रूप से माना ही नहीं कि कसाब पाकिस्तानी नागरिक है. हालाँकि कसाब का पंजाबी पाकिस्तानी उच्चारण चीख चीखकर बयान कर रहा था कि यकीनन वह पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त के फरीदकोट का है। कुलभूषण जाधव का भी एक विडिओ जारी किया गया है, जिसमें उसने कमोबेश इसी पैटर्न पर कुबूलनामा पेश किया है। पाकिस्तान में सियासत गरम है कि कुलभूषण को फांसी देके रहेंगे और भारत में राजनीति गरम है कि कुलभूषण के परिवार वालों के साथ बदसुलुकी हुई है और भारत चुप नहीं बैठेगा।
मुझे सच नहीं पता, निष्कर्ष आप निकालें !!!

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